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मत टालो

हम सदैव इस बात का स्मरण रखें कि प्रत्येक क्षण हमारा जीवन क्षीणता को प्राप्त हो रहा है। हम इस क्षण के प्रभाव को रोक नहीं सकते, किन्तु अगर विवेक का आश्रय ले लें तो प्रत्येक क्षण हमारे जीवन का वरदान बन सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि हम शीघ्रातिशीघ्र इस पाठ को याद कर लें कि आज का काम कल पर नहीं टालना है। अगर हमें यह पाठ याद हो गया तो फिर हमें कभी भी पछताना नहीं पड़ेगा। इस कथन को डोंगरे महाराज द्वारा प्रस्तुत इस प्रसिद्ध उदाहरण से समझने का प्रयास करें-
एक दिन धर्मराज युधिष्ठिर के पास कोई याचक आया। धर्मराज उस समय किसी आवश्यक काम में संलग्न थे। अत: उन्होंने याचक को दूसरे दिन आने को कहा। भीमसेन ने जब यह सुना तो तत्काल विजय-दुन्दुभि बजाने लगा। सबको आश्चर्य हुआ, क्योंकि विजय-दुन्दुभि तो युद्ध में विजय प्राप्त करने के पश्चात् बजाई जाती है और यहां तो ऎसा प्रसंग कोई नहीं था। फिर भीमसेन ने ऎसा क्यों किया? भीम ने कहा- आज बड़े भैया ने काल पर विजय प्राप्त कर ली है। उन्हें पूरा विश्वास है कि कल तक काल उनको स्पर्श नहीं कर सकता। कल तक वे निश्चित रूप से जीवित रहने वाले हैं। इसलिए उन्होंने याचक को कल आने को कहा है। चूंकि उन्होंने काल को जीत लिया, अत: मैं विजय-दुन्दुभि बजा रहा हूं। धर्मराज भीमसेन के कटाक्ष को समझ गए। उन्हें अपनी भूल समझ में आ गई। सचमुच कल किसने देखा है! याचक को बुलवाकर दान दिया गया। शुभस्य शीघ्रम्! सत्कर्म को कभी कल पर मत छोड़ो। उसे तत्काल करो।

नोकरी करने के कुछ नुस्खे

नोकरी करने के कुछ नुस्खे :

१) बने रहो पगले , काम करेंगे अगले !!!!

२)काम से रहो गुल , तनख्वाह पाओ फुल !!!!

३)मत लो टेंशन वरना परिवार पायेगा पेंशन !!!!

४)काम से डरो नहीं और काम को करो नहीं !!!!

५) काम करो या ना करो , काम की फिक्र जरुर करो;
और फिक्र करो या ना करो पर उसका जिक्र जरुर करो !!!!

.......जनहित में जारी ................
.........और किसी परेशानी के लिए भी सम्पर्क कर सकते हैं .......

होनहार सेल्समेन

एक लड़के को सेल्समेन के इंटरव्यू में इसलिए बाहर कर दिया गया क्योंकि उसे अंग्रेजी नहीं आती थी। लड़के को अपने आप पर पूरा भरोसा था । उसने मैनेजर से कहा कि आपको अंग्रेजी से क्या मतलब ? यदि मैं अंग्रेजी वालों से ज्यादा बिक्री न करके दिखा दूं तो मुझे तनख्वाह मत दीजिएगा।
मैनेजर को उस लड़के बात जम गई। उसे नौकरी पर रख लिया गया।
फिर क्या था, अगले दिन से ही दुकान की बिक्री पहले से ज्यादा बढ़ गई। एक ही सप्ताह के अंदर लड़के ने तीन गुना ज्यादा माल बेचकर दिखाया।
स्टोर के मालिक को जब पता चला कि एक नए सेल्समेन की वजह से बिक्री इतनी ज्यादा बढ़ गई है तो वह खुद को रोक न सका । फौरन उस लड़के से मिलने के लिए स्टोर पर पहुंचा। लड़का उस वक्त एक ग्राहक को मछली पकड़ने का कांटा बेच रहा था। मालिक थोड़ी दूर पर खड़ा होकर देखने लगा।
लड़के ने कांटा बेच दिया। ग्राहक ने कीमत पूछी। लड़के ने कहा - 800 रु. । यह कहकर लड़के ने ग्राहक के जूतों की ओर देखा और बोला - सर, इतने मंहगे जूते पहनकर मछली पकड़ने जाएंगे क्या ? खराब हो जाएंगे। एक काम कीजिए, एक जोड़ी सस्ते जूते और ले लीजिए।
ग्राहक ने जूते भी खरीद लिए। अब लड़का बोला - तालाब किनारे धूप में बैठना पड़ेगा। एक टोपी भी ले लीजिए। ग्राहक ने टोपी भी खरीद ली। अब लड़का बोला - मछली पकड़ने में पता नहीं कितना समय लगेगा। कुछ खाने पीने का सामान भी साथ ले जाएंगे तो बेहतर होगा। ग्राहक ने बिस्किट, नमकीन, पानी की बोतलें भी खरीद लीं।
अब लड़का बोला - मछली पकड़ लेंगे तो घर कैसे लाएंगे। एक बॉस्केट भी खरीद लीजिए। ग्राहक ने वह भी खरीद ली। कुल 2500 रु. का सामान लेकर ग्राहक चलता बना।
मालिक यह नजारा देखकर बहुत खुश हुआ । उसने लड़के को बुलाया और कहा - तुम तो कमाल के आदमी हो यार ! जो आदमी केवल मछली पकड़ने का कांटा खरीदने आया था उसे इतना सारा सामान बेच दिया ?
लड़का बोला - कांटा खरीदने ? अरे वह आदमी तो केयर फ्री सेनिटरी पैक खरीदने आया था । मैंने उससे कहा अब चार दिन तू घर में बैठा बैठा क्या करेगा । जा के मछली पकड़ ......
Suresh Jain

Girls Psychology

!! ||Girls Psychology|| !!!

*** Fraud with Innocent Boys ***

*** Fun with Handsome Boys ***

*** Friendship with Charming Boys ***

*** Contact with Intelligent Boys ***

*** Flirt with Freaky Boys ***

*** Love with Faithful Boys ***

& in the end

*** Marriage with the Rich Boy ***

!!! Moral of the story !!!

Chandramukhi ho yaa Paaro, Sab Ek jaisi hai Yaaro !

Murgi

Murgi anda deti hai

anda to safed hota hai

safed to dhood bhi hota hai

lekin dhood to bhains deti hai

lekin bhains to kali hoti hai

kala to bangali hota hai

bangali to paan khata hai

paan to lal hota hai

lal to gulab hota hai

gulab main to kante hote hai

kante to machli main bhi hote hai

lekin machli to achhi hoti hai

achha to aadmi bhi hota hai

lekin aadmi to lamba hota hai

lamba to ye scrap bhi hai

lekin mujhe usase kya

mujhe to tumhara dimag khana tha kha liya


ab yeh batao kaise ho

काश ये २० बातें मुझे पहले पता होतीं

  1. खर्च करने पर नियंत्रण - यूँही पैसा उड़ा देने की आदत ने मुझे बड़े आर्थिक संकट में डाला। मैं ऐसे कपड़े खरीदता था जिनकी मुझे ज़रूरत नहीं थी। ऐसे गैजेट खरीद लेता था जिन्हें सिर्फ़ अपने पास रखना चाहता था। ऑनलाइन खरीददारी करता था क्योंकि ये बहुत आसान है। अपनी बड़ी स्पोर्ट्स यूटिलिटी वेहिकल मैंने सिर्फ़ औरतों को आकर्षित और प्रभावित करने के चक्कर में खरीद ली। मुझे अब ऐसे किसी भी चीज़ पर गर्व नहीं होता। मैंने आदतन पैसा खर्च करने के स्वभाव पर काबू पा लिया है। अब कुछ भी खरीदने से पहले मैं थोड़ा समय लगाता हूँ। मैं यह देखता हूँ कि क्या मेरे पास उसे खरीदने के लिए पैसे हैं, या मुझे उसकी वाकई ज़रूरत है या नहीं। १५ साल पहले मुझे इसका बहुत लाभ मिला होता।
  2. सक्रिय-गतिमान जीवन – जब मैं हाईस्कूल में था तब भागदौड़ और बास्केटबाल में भाग लेता था। कॉलेज पहुँचने के बाद मेरा खेलकूद धीरे-धीरे कम होने लगा। यूँ तो मैं चलते-फिरते बास्केटबाल हाईस्कूल के बाद भी खेलता रहा पर वह भी एक दिन बंद हो गया और ज़िंदगी से सारी गतिशीलता चली गयी। बच्चों के साथ बहार खेलने में ही मेरी साँस फूलने लगी। मैं मोटा होने लगा। अब मैंने बहुत दौड़भाग शुरू कर दी है पर बैठे-बैठे सालों में जमा की हुई चर्बी को हटाने में थोड़ा वक़्त लगेगा।
  3. आर्थिक नियोजन करना – मैं हमेशा से यह जानता था कि हमें अपने बजट और खर्चों पर नियंत्रण रखना चाहिए। इसके बावजूद मैंने इस मामले में हमेशा आलस किया। मुझे यह ठीक से पता भी नहीं था कि इसे कैसे करते हैं। अब मैंने इसे सीख लिया है और इसपर कायम रहता हूँ। हां, कभी-कभी मैं रास्ते से थोड़ा भटक भी जाता हूँ पर दोबारा रास्ते पर आना भी मैंने सीख लिया है। ये सब आप किसी किताब से पढ़कर नहीं सीख सकते। इसे व्यवहार से ही जाना जा सकता है। अब मैं यह उम्मीद करता हूँ कि अपने बच्चों को मैं यह सब सिखा पाऊँगा।
  4. जंक फ़ूड पेट पर भारी पड़ेगा – सिर्फ़ ठहरी हुई लाइफस्टाइल के कारण ही मैं मोटा नहीं हुआ। बाहर के तले हुए भोजन ने भी इसमें काफी योगदान दिया। हर कभी मैं बाहर पिज्जा, बर्गर, और इसी तरह की दूसरी चर्बीदार तली हुई चीज़ें खा लिया करता था। मैंने यह कभी नहीं सोचा कि इन चीज़ों से कोई समस्या हो सकती है। अपने स्वास्थ्य के बारे में तो हम तभी सोचना शुरू करते हैं जब हम कुछ प्रौढ़ होने लगते हैं। एक समय मेरी जींस बहुत टाइट होने लगी और कमर का नाप कई इंच बढ़ गया। उस दौरान पेट पर चढी चर्बी अभी भी पूरी तरह से नहीं निकली है। काश किसी ने मुझे उस समय ‘आज’ की तस्वीर दिखाई होती जब मैं जवाँ था और एक साँस में सोडे की बोतल ख़त्म कर दिया करता था।
  5. धूम्रपान सिर्फ़ बेवकूफी है – धूम्रपान की शुरुआत मैंने कुछ बड़े होने के बाद ही की। क्यों की, यह बताना ज़रूरी नहीं है लेकिन मुझे हमेशा यह लगता था कि मैं इसे जब चाहे तब छोड़ सकता हूँ। ऐसा मुझे कई सालों तक लगता रहा जब एक दिन मैंने छोड़ने की कोशिश की लेकिन छोड़ नहीं पाया। पाँच असफल कोशिशों के बाद मुझे यह लगने लगा कि मेरी लत वाकई बहुत ताकतवर थी। आखिरकार १८ नवम्बर २००५ को मैंने धूम्रपान करना पूरी तरह बंद कर दिया लेकिन इसने मेरा कितना कुछ मुझसे छीन लिया।
  6. रिटायरमेंट की तैयारी – यह बात और इससे पहले बताई गयी बातें बहुत आम प्रतीत होती हैं। आप यह न सोचें कि मुझे इस बात का पता उस समय नहीं था जब मैं १८ साल का था। मैं इसे बखूबी जानता था लेकिन मैंने इसके बारे में कभी नहीं सोचा। जब तक मैं ३० की उम्र पार नहीं कर गया तब तक मैंने रिटायर्मेंट प्लानिंग के बारे में कोई चिंता नहीं की। अब मेरा मन करता है कि उस १८ वर्षीय लियो को इस बात के लिए एक चांटा जड़ दिया जाए। खैर। अब तक तो मैं काफी पैसा जमा कर चुका होता! मैंने भी रिटायर्मेंट प्लान बनाया था लेकिन मैंने तीन बार जॉब्स बदले और अपना जमा किया पैसा यूँही उड़ा दिया।
  7. जो कुछ भी आपको कठिन लगता है वह आपके काम का होता है – यह ऐसी बात है जो ज्यादा काम की नहीं लगती। एक समय था जब मुझे काम मुश्किल लगता था। मैंने काम किया ज़रूर, लेकिन बेमन किया। अगर काम न करने की छूट होती तो मैं नहीं करता। परिश्रम ने मुझे बहुत तनाव में डाला। मैं कभी भी परिश्रम नहीं करना चाहता था। लेकिन मुझे मिलने वाला सबक यह है कि जितना भी परिश्रम मैंने अनजाने में किया उसने मुझे सदैव दूर तक लाभ पहुँचाया। आज भी मैं उन तनाव के दिनों में कठोर परिश्रम करते समय सीखे हुए हुनर और आदतों की कमाई खा रहा हूँ। उनके कारण मैं आज वह बन पाया हूँ जो मैं आज हूँ। इसके लिए मैं युवक लियो का हमेशा अहसानमंद रहूँगा।
  8. बिना जांचे-परखे कोई पुराना सामान नहीं खरीदें – मैंने एक पुरानी वैन खरीदी थी। मुझे यह लग रहा था की मैं बहुत स्मार्ट था और मैंने उसे ठीक से जांचा-परखा नहीं। उस खटारा वैन के इंजन में अपार समस्याएँ थीं। उसका एक दरवाजा तो चलते समय ही गिर गया। खींचते समय दरवाजे का हैंडल टूट गया। कांच भी कहीं टपक गया। टायर बिगड़ते गए, खिड़कियाँ जाम पडी थीं, और एक दिन रेडियेटर भी फट गया। अभी भी मैं ढेरों समस्याएँ गिना सकता हूँ। वह मेरे द्वारा ख़रीदी गयी सबसे घटिया चीज़ थी। यह तो मैं अभी भी मानता हूँ की पुरानी चीज़ों को खरीदने में समझदारी है लेकिन उन्हें देख-परख के ही खरीदना चाहिए।
  9. बेचने से पहले ही सारी बातें तय कर लेने में ही भलाई है – अपने दोस्त के दोस्त को मैंने अपनी एक कार बेची। मुझे यकीन था कि बगैर लिखा-पढी के ही वह मुझे मेरी माँगी हुई उचित कीमत अदा कर देगा। यह मेरी बेवकूफी थी। अभी भी मुझे वह आदमी कभी-कभी सड़क पर दिख जाता है लेकिन अब मुझमें इतनी ताक़त नहीं है कि मैं अपना पैसा निकलवाने के लिए उसका पीछा करूँ।
  10. कितनी भी व्यस्तता क्यों न हो, अपना शौक पूरा करो – मैं हमेशा से ही लेखक बनना चाहता था। मैं चाहता था कि एक दिन लोग मेरी लिखी किताबें पढ़ें लेकिन मेरे पास लिखने का समय ही नहीं था। पूर्ण-कालिक नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियां होने के कारण मुझे लिखने का वक़्त नहीं मिल पाता था। अब मैं यह जान गया हूँ कि वक़्त तो निकालना पड़ता है। दूसरी चीज़ों से ख़ुद को थोड़ा सा काटकर इतना समय तो निकला ही जा सकता है जिसमें हम वो कर सकें जो हमारा दिल करना चाहता है। मैंने अपनी ख्वाहिश के आड़े में बहुत सी चीज़ों को आने दिया। यह बात मैंने १५ साल पहले जान ली होती तो आजतक मैं १५ किताबें लिख चुका होता। सारी किताबें तो शानदार नहीं होतीं लेकिन कुछेक तो होतीं!
  11. जिसकी खातिर इतना तनाव उठा रहे हैं वो बात हमेशा नहीं रहेगी – जब हमारा बुरा वक़्त चल रहा होता है तब हमें पूरी दुनिया बुरी लगती है। मुझे समयसीमा में काम करने होते थे, कई प्रोजेक्ट एक साथ चल रहे थे, लोग मेरे सर पर सवार रहते थे और मेरे तनाव का स्तर खतरे के निशान के पार जा चुका था। मुझे मेहनत करने का कोई पछतावा नहीं है (जैसा मैंने ऊपर कहा) लेकिन यदि मुझे इस बात का पता होता कि इतनी जद्दोजहद और माथापच्ची १५ साल तो क्या अगले ५ साल बाद बेमानी हो जायेगी तो मैं अपने को उसमें नहीं खपाता। परिप्रेक्ष्य हमें बहुत कुछ सिखा देता है।
  12. काम के दौरान बनने वाले दोस्त काम से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं – मैंने कई जगहों में काम किया और बहुत सारी चीज़ें खरीदीं और इसी प्रक्रिया में बहुत सारे दोस्त भी बनाये। काश मैं यहाँ-वहां की बातों में समय लगाने के बजाय अपने दोस्तों और परिजनों के साथ बेहतर वक़्त गुज़र पाता!
  13. टी वी देखना समय की बहुत बड़ी बर्बादी है – मुझे लगता है कि साल भर में हम कई महीने टी वी देख चुके होते हैं। रियालिटी टी वी देखने में क्या तुक है जब रियालिटी हाथ से फिसली जा रही हो? खोया हुआ समय कभी लौटकर नहीं आता – इसे टी वी देखने में बरबाद न करें।
  14. बच्चे समय से पहले बड़े हो जायेंगे। समय नष्ट न करें – बच्चे देखते-देखते बड़े हो जाते हैं। मेरी बड़ी बेटी क्लो कुछ ही दिनों में १५ साल की हो जायेगी। तीन साल बाद वह वयस्क हो जायेगी और फ़िर मुझसे दूर चली जायेगी। तीन साल! ऐसा लगता है कि यह वक़्त तो पलक झपकते गुज़र जाएगा। मेरा मन करता हूँ कि १५ साल पहले जाकर ख़ुद को झिड़क दूँ – दफ्तर में रात-दिन लगे रहना छोडो! टी वी देखना छोडो! अपने बच्चों के साथ ज्यादा से ज्यादा समय व्यतीत करो! – पिछले १५ साल किती तेजी से गुज़र गए, पता ही न चला।
  15. दुनिया के दर्द बिसराकर अपनी खुशी पर ध्यान दो – मेरे काम में और निजी ज़िंदगी में मेरे साथ ऐसा कई बार हुआ जब मुझे लगने लगा कि मेरी दुनिया बस ख़त्म हो गयी। जब समस्याएँ सर पे सवार हो जाती थीं तो अच्छा खासा तमाशा बन जाता था। इस सबके कारण मैं कई बार अवसाद का शिकार हुआ। वह बहुत बुरा वक़्त था। सच तो यह था कि हर समस्या मेरे भीतर थी और मैं सकारात्मक दृष्टिकोण रखकर खुश रह सकता था। मैं यह सोचकर खुश हो सकता था कि मेरे पास कितना कुछ है जो औरों के पास नहीं है। अपने सारे दुःख-दर्द मैं ताक पर रख सकता था।
  16. ब्लॉग्स केवल निजी पसंद-नापसंद का रोजनामचा नहीं है – पहली बार मैंने ब्लॉग्स ७-८ साल पहले पढ़े। पहली नज़र में मुझे उनमें कुछ ख़ास रूचि का नहीं लगा – बस कुछ लोगों के निजी विचार और उनकी पसंद-नापसंद! उनको पढ़के मुझे भला क्या मिलता!? मुझे अपनी बातों को दुनिया के साथ बांटकर क्या मिलेगा? मैं इन्टरनेट पर बहुत समय बिताता था और एक वेबसाईट से दूसरी वेबसाईट पर जाता रहता था लेकिन ब्लॉग्स से हमेशा कन्नी काट जाता था। पिछले ३-४ सालों के भीतर ही मुझे लगने लगा कि ब्लॉग्स बेहतर पढने-लिखने और लोगों तक अपनी बात पहुंचाने और जानकारी बांटने का बेहतरीन माध्यम हैं। ७-८ साल पहले ही यदि मैंने ब्लॉगिंग शुरू कर दी होती तो अब तक मैं काफी लाभ उठा चुका होता।
  17. याददाश्त बहुत धोखा देती है – मेरी याददाश्त बहुत कमज़ोर है। मैं न सिर्फ़ हाल की बल्कि पुरानी बातें भी भूल जाता हूँ। अपने बच्चों से जुडी बहुत सारी बातें मुझे याद नहीं हैं क्योंकि मैंने उन्हें कहीं लिखकर नहीं रखा। मुझे ख़ुद से जुडी बहुत सारी बातें याद नहीं रहतीं। ऐसा लगता है जैसे स्मृतिपटल पर एक गहरी धुंध सी छाई हुई है। यदि मैंने ज़रूरी बातों को नोट कर लेने की आदत डाली होती तो मुझे इसका बहुत लाभ मिलता।
  18. शराब बुरी चीज़ है – मैं इसके विस्तार में नहीं जाऊँगा। बस इतना कहना ही काफी होगा कि मुझे कई बुरे अनुभव हुए हैं। शराब और ऐसी ही कई दूसरी चीज़ों ने मुझे बस एक बात का ज्ञान करवाया है – शराब सिर्फ़ शैतान के काम की चीज़ है।
  19. आप मैराथन दौड़ने का निश्चय कभी भी कर सकते हैं – इसे अपना लक्ष्य बना लीजिये – यह बहुत बड़ा पारितोषक है। स्कूल के समय से ही मैं मैराथन दौड़ना चाहता था। यह एक बहुत बड़ा सपना था जिसे साकार करने में मैंने सालों लगा दिए। मैराथन दौड़ने पर मुझे पता चला कि यह न सिर्फ़ सम्भव था बल्कि बहुत बड़ा पारितोषक भी था। काश मैंने दौड़ने की ट्रेनिंग उस समय शुरू कर दी होती जब मैं हल्का और तंदरुस्त था, मैं तब इसे काफी कम समय में पूरा कर लेता!
  20. इतना पढने के बाद भी मेरी गलतियाँ दुहराएंगे तो पछतायेंगे – १८ वर्षीय लियो ने इस पोस्ट को पढ़के यही कहा होता – “अच्छी सलाह है।” और इसके बाद वह न चाहते हुए भी वही गलतियाँ दुहराता। मैं बुरा लड़का नहीं था लेकिन मैंने किसी की सलाह कभी नहीं मानी। मैं गलतियाँ करता गया और अपने मुताबिक ज़िंदगी जीता गया। मुझे इसका अफ़सोस नहीं है। मेरा हर अनुभव (शराब का भी) मुझे मेरी ज़िंदगी की उस राह पर ले आया है जिसपर आज मैं चल रहा हूँ। मुझे अपनी ज़िंदगी से प्यार है और मैं इसे किसी के भी साथ हरगिज नहीं बदलूँगा। दर्द, तनाव, तमाशा, मेहनत, परेशानियाँ, अवसाद, हैंगओवर, क़र्ज़, मोटापा – सलाह न मानने के इन नतीजों का पात्र था मैं।

एक शराबी

एक शराबी आधे घण्टे से शराब का प्याला सामने रख कर उसे घूरे जा रहा था । उसी बार में मस्तमौला बंता भी बैठा हुआ था। उसे मजाक सूझा। वह उठा और उसने शराबी के सामने रखा हुआ जाम एक ही सांस में खाली कर दिया। यह देखकर शराबी रोने लगा।
बंता - रो मत यार ! तू काफी देर से चुपचाप बैठा हुआ था इसलिए मैंने तो मजाक किया था । चल मैं तेरे लिए दूसरा गिलास मंगा देता हूं .....
शराबी - मैं शराब के लिए नहीं रो रहा हूं। मैं तो अपनी किस्मत को रो रहा हूं। आज का दिन मेरी जिंदगी का सबसे बुरा दिन है। आज मैं देर से ऑफिस पहुंचा तो बॉस ने नौकरी से निकाल दिया। बाहर आया तो देखा मेरी गाड़ी चोरी हो चुकी थी। किसी तरह घर पहुंचा तो पता चला कि मेरी बीबी मेरा सारा पैसा और सामान लेकर अपने प्रेमी के साथ चंपत हो चुकी थी। आखिर में मैं इस बार में आया और आत्महत्या करने की सोच ही रहा था कि तुम आ गए और मेरा जहर मिला शराब का गिलास पी गए .... सचमुच मेरा तो दिन बहुत ही खराब है ....

2- एक हवाईजहाज में चार लोग सवार थे - पायलट, एक किशोर, एक बुजुर्ग और एक दार्शनिक। उड़ान के दौरान अचानक विमान के इंजन में खराबी आ गई । पायलट ने घोषणा की कि अब इस विमान का बचना संभव नहीं है और विमान में सिर्फ तीन ही पैराशूट हैं। किसी एक को तो अवश्य ही मरना होगा। इतना कहकर पायलट फुर्ती से अपने केबिन से निकला और बोला - चूंकि मुझे इस खराबी से संबंधित जानकारी हेडक्वार्टर को देनी होगी अत: मेरा बचना जरूरी है। इतना कहकर उसने एक पैराशूट उठाया और कूद गया। अब दो पैराशूट बचे। दार्शनिक महोदय अपने स्थान से उठे और बोले - मैंने ऑक्सफोर्ड और केम्ब्रिज में पढ़ाई की है। ढेर सारी किताबें लिखीं हैं। मेरे जैसे विद्वान दुनिया में कम ही हैं । अभी दुनिया को मेरी विद्वता की बहुत जरूरत है अत: मेरा बचना बहुत जरूरी है। इतना कहकर उन्होंने भी एक पैराशूट उठाया और कूद गए।

अब सिर्फ एक पैराशूट बचा था। बुजुर्ग सज्जन ने किशोर की ओर देखा और कहा - बेटा, मैं अपनी जिंदगी जी चुका हूं और दो-चार साल में वैसे भी मर जाने वाला हूं। तुम्हारे सामने अभी पूरी जिंदगी पड़ी है। तुम यह पैराशूट उठाओ और कूद जाओ ।

किशोर बोला - चिन्ता मत करो, हम दोनों ही बच जाएंगे। दुनिया के सबसे बड़े विद्वान व्यक्ति पैराशूट की जगह मेरा कपड़ों का बैग उठाकर कूद गए हैं ......

3-
एक महिला अपनी कंपनी की तरफ से दो सप्ताह के प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने के लिए लंदन जा रही थी। प्रस्थान वाले दिन उसने अपने पति से पूछा - तुम्हारे लिए लंदन से क्या लाऊं ?
पति ने शरारत भरे अंदाज में कहा - एक अंग्रेज लड़की ले आना !
पत्नी ने कोई जवाब नहीं दिया और चुपचाप चली गई।
दो सप्ताह बाद जब पत्नी लौटकर आई तो पति उसे लेने एयरपोर्ट पहुंचा ।
पति ने पूछा - कैसी रही तुम्हारी यात्रा ?
पत्नी ने जवाब दिया - बहुत अच्छी ।
पति ने फिर शरारत के अंदाज में पूछा - तुम कहकर गईं थीं कि मेरे लिए कुछ लाओगी पर तुम्हारे साथ तो कुछ दिख नहीं रहा ?
पत्नी ने पेट पर हाथ फिराते हुए मुस्कुराकर जवाब दिया - ले आई हूं न!  यह अंग्रेज तो है, पर लड़की ही है, यह जानने के लिए कुछ महीने इंतजार करना पड़ेगा .....
4-
संता की नई-नई शादी हुई थी लेकिन फिर भी उसे शाम को घर जाने की कोई जल्दी नहीं रहती थी। वह देर तक ऑफिस में बैठा रहता।
एक दिन उसके बॉस ने उससे कारण पूछा तो संता ने जवाब दिया - बात यह है सर कि मेरी पत्नी भी नौकरी करती है और हम दोनों में से जो भी घर पहले पहुंचता है खाना उसे ही बनाना पड़ता है .....

5-
संता - मेरी दोनों पत्नियों के साथ ही मेरा बुरा अनुभव रहा है ।
बंता - वह कैसे ?
संता - पहली वाली मुझे छोड़कर चली गई और दूसरी वाली मुझे छोड़कर जाना नहीं चाहती .....

6-
एक फौजी अफसर को किसी लम्बी डयूटी पर विदेश भेजा गया। जब उसे वहां रहते काफी दिन हो गए तो एक दिन उसे एक पत्र मिला जिसमें लिखा था - ''चलते समय मैंने आपको जो फोटो दी थी, वह वापस कर दीजिए क्योंकि अब मैं एक बैंक मैनेजर से शादी करना चाहती हूं।''
फौजी अफसर ने दो दर्जन से भी अधिक फोटो उस लड़की को भेज दिए और लिखा - ''इसमें से अपनी फोटो निकालकर बाकी वापस भेज दीजिए।''

7-दि आप अपने विवाहित जीवन को सुखी देखना चाहते हैं तो आपके लिए सलाह है कि -
  • जब भी आप गलत हों - अपनी गलती चुपचाप मान लें ।
  • जब भी आप सही हों - तो कृपया चुप रहें ।
8-एक दुकान के बाहर लिखा था - इन्सानों की तरह बात करने वाला कुत्ता बेचना है, सम्पर्क करें। एक आदमी ने दुकानदार से कहा - खरीदने से पहले मैं उस कुत्ते को देखना चाहता हूं।
दुकानदार आदमी को कुत्ते के पास ले गया। आदमी ने कुत्ते से पूछा - क्यों भई, क्या कर रहे हो ?
कुत्ता बोला - कुछ खास नहीं । बस इसकी दुकान की रखवाली करता रहता हूं। वैसे पहले मैं अमरीकी सरकार के खुफिया विभाग में था। मैंने कई बड़े बड़े आतंकवादियों को पकड़वाया था। उसके बाद मैं ब्रिटेन के रक्षा विभाग में तैनात कर दिया गया। अब वहां से रिटायर होकर इधर आ गया हूं।
आदमी ने दुकानदार से पूछा - इतने गुणवान कुत्ते को आप बेचना क्यों चाहते हैं ?
दुकानदार ने जवाब दिया - अरे आप इसकी बातों का भरोसा मत कीजिए। कमीना एक नंबर का झूठा है .....

9-
गांव की एक लड़की ने अपनी मां की इच्छा के विपरीत उच्च शिक्षा के लिए शहर के कॉलेज में दाखिला लिया। चलते वक्त उसकी मां ने उसे चेतावनी दी - बेटी, अकेली रहने जा तो रही हो पर जरा संभल कर रहना। अगर तुम्हारे कमरे में किसी मर्द की छाया भी पड़ी तो मुझे मर गई ही समझना।
कुछ दिन बाद मां ने बेटी के हॉस्टल फोन लगाया तो जवाब मिला कि वह कमरे में नहीं है। कुछ देर बाद उसने फिर फोन लगाया पर बेटी तब भी कमरे पर नहीं थी। मां को बहुत चिंता हुई । पता नहीं कहां-कहां घूम रही है। आखिरकार रात को एक बजे बेटी से फोन पर बात हुई । मां ने डांटते हुए पूछा - कहां गई थी इतनी देर तक ? आखिर पड़ गई न किसी लड़के के चक्कर में .....?
बेटी ने जवाब दिया - तुम चिंता न करो मां ! मैंने उसे अपने कमरे में नहीं आने दिया। बल्कि मैं ही उसके कमरे पर गई थी ताकि उसकी मां मर जाए..... मेरी नहीं .........
10-
एक आदमी नाई की दुकान में हजामत बनवाने गया। उसने नाई से आग्रह किया कि हजामत एकदम चिकनी होनी चाहिए।
नाई ने उसे एक लकड़ी की छोटी सी गेंद दी और उसे गाल और मसूढ़ों के बीच में रखने को कहा। आदमी ने वैसा ही किया।
नाई ने हजामत बनाना शुरू किया। बीच में अचानक आदमी आदमी बोला - अगर कहीं मैं इस गेंद को निगल गया तो ?
- कोई बात नहीं। किसी किसी के साथ ऐसा हो जाता है। बस, कल सुबह इसे वापस जरूर कर जाइये जैसे और लोग कर जाते हैं ......
11-
एक सज्जन अपने मित्र से मिलने उसके गांव जा रहे थे। रास्ते में उनकी मोटरकार का पहिया एक कीचड़ से भरे गङ्ढे में फंस गया। उन्होंने पूरी कोशिश की पर पहिया निकालने में असफल रहे। कुछ देर बाद एक किसान अपने बैलों के साथ उस सड़क से गुजरा। सज्जन ने उसे देखकर मदद करने की प्रार्थना की। किसान ने इस काम के लिये उनसे पांच सौ रूपये की मांग की। मरता क्या न करता । सज्जन राजी हो गये।
कुछ देर की मेहनत के बाद किसान ने पहिये को गङ्ढे से बाहर निकाल दिया। रुपये गिनकर जेब में रखते हुये किसान बोला - ''आपको पता है आजकल सारा दिन मैं इसी काम में व्यस्त रहता हूं। आज ही ये दसवीं मोटरकार है जिसे मैंने इस गङ्ढे से निकाला है।''
''तो फिर तुम अपने खेत कब जोतते हो ? रात में ?'' - सज्जन ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा ।
''अरे नहीं,'' किसान ने पूरी गंभीरता से कहा - ''रात में तो मुझे इस गङ्ढे में मिट्टी और पानी डालना होता है!'

12-चीन की जेल में तीन कैदी, एक-दूसरे से जेल में आने की वजहें पूछ रहे थे। एक ने बताया 'मैं हर रोज काम पर पाँच मिनट देर से आता था, इसलिए वक्त की कद्र न करने के जुर्म में सजा हुई।
दूसरे ने बताया- 'मैं पाँच मिनट पहले काम पर पहुँचता था, इसलिए मुझे भी वक्त की बरबादी के आरोप में सजा दी गई।
तीसरे ने रुऑंसा होकर कहा- 'मैं, नसीब का मारा, हर रोज दफ्तर में ठीक समय पर हाजिर होता था। और मुझे अमेरिकन घडी रखने के संदेह में सजा हो गई।

हे पार्थ ।। ( कर्मचारी)

हे पार्थ ।। ( कर्मचारी)

इनक्रीमट अच्छा नही हुआ, बुरा हुआ
इनसेंटिव नही मिला, ये भी बुरा हुआ
वेतन में कटौती हो रही है बुरा हो रहा है,

तुम पिछले इनसेंटिव ना मिलने का पश्चाताप ना करों,
तुम अगले इनसेंटिव की चिंता भी मत करों,
बस अपने वेतन में सन्तुष्ट रहो

तुम्हारी जेब से क्या गया, जो रोते हो?
जो आया था सब यही से आया था

तुम जब नही थे, तब भी ये कंपनी चल रही थी,
तुम जब नही होंगे, तब भी चलेगी,
तुम कुछ भी लेकर यहां नही आए थे
जो अनुभव मिला यहीं मिला
जो भी काम किया जो कंपनी के लिए किया,
डिग्री लेकर आए थे, अनुभव लेकर जाओगे

जो कम्प्युटर आज तुम्हारा है,
यह कल किसी और का था
कल किसी और का होगा और परसो किसी और का होगा
तुम इसे अपना समझ कर क्यो मगन हो क्यो खुश हो
यही खुशी तुम्हारी समस्त परेशानियों का मूल कारण हैं
क्या व्यर्थ चिंता करते हो, किससे व्यर्थ डरते हो,
कौन तुम्हे निकाल सकता है ?


सतत 'नियम-परिर्वतन' कंपनी का नियम हैं
जिसे तुम ' नियम-परिर्वतन' कहते हो, वही तो चाल है
एक पल में तुम बैस्ट परफॉर्मर और हीरो नम्बर वन या सुपर स्टार हो
दूसरे पल में तुम वर्स्ट परफॉर्मर बन जाते हो ओर टारगेट अचीव नही कर पाते हो

ऐप्रजल, इनसेंटिव ये सब अपने मन से हटा दो,
अपने विचार मिटा दो,
फिर कंपनी तुम्हारी है और तुम कंपनी के
ना ये इन्क्रीमेंट वगैरह तुम्हारे लिए है
ना तुम इसके लिए हो,

पंरतु तुम्हारा जॉब सुरक्षित है
फिर तुम परेशान क्यों होते हो ?
तुम अपने आप को कंपनी को अर्पित कर दो,
मत करो इन्क्रीमट की चिंता बस मन लगाकर अपना कर्म किये जाओ
वही सबसे बडा गोल्डन रूल है
जो इस गोल्डन रूल को जानता है वो ही सुखी है
वोह इन रिव्यू, इनसेंटिव, ऐप्रेजल, रिटायरमेंट आदि के बंधन से सदा के लिए मुक्त हो जाता हैं
तो तुम भी मुक्त होने का प्रयास करों और खुश रहो

परिभाषाएं

किशोरावस्था : वो आयु जिसमें लड़के लड़कियों को ताड़ने लगते हैं और लड़कियां ताड़ने लगती हैं कि लड़के उन्हें ताड़ने लगे हैं. 
वास्तविक आशावादी : ऐसा गंजा जो बाल उगाने वाला वो ही तेल खरीदता है जिसके साथ कंघी फ्री हो.
 
मच्छर : इंजेक्शन की ऐसी सिरिंज जो उड़ सकती है. 
कामयाब व्यक्ति : जिसे पहली बीवी की वजह से कामयाबी हासिल होती है और कामयाबी की वजह से दूसरी बीवी हासिल होती है. 
बीबी : वह स्त्री, जो शादी के बाद कुछ सालों में टोक-टोक कर आपकी सारी आदतें बदल दे और फिर कहे कि आप कितना बदल गए हैं।
 
समिति : ऐसे व्यक्ति जो अकेले कुछ नहीं कर सकते, परंतु यह निर्णय मिलकर करते हैं कि साथ साथ कुछ नहीं किया जा सकता। 
कार्यालय : वह स्थान जहां आप घर के तनावों से मुक्ति पाकर विश्राम कर सकते हैं।
 
श्रेष्ठ पुस्तक : जिसकी सब प्रशंसा करते हैं परंतु पढ़ता कोई नहीं है। 
परम आनंद : एक ऐसी अनुभूति जब आप अनुभव करते हैं कि आप एक ऐसी अनुभूति को अनुभव करने जा रहे हैं जो आपने पहले कभी अनुभव नहीं की है।
 
कान्फ्रेन्स रूम : वह स्थान जहां हर व्यक्ति बोलता है, कोई नहीं सुनता है और अंत में सब असहमत होते हैं। 
समझौता : किसी चीज को बांटने का वह तरीका जिसमें हर व्यक्ति यह समझता है कि उसे बड़ा हिस्सा मिला।


व्याख्यान : सूचना को स्थानांतरित करने का एक तरीका जिसमें व्याख्याता की डायरी के नोट्स, विद्यार्थियों की डायरी में बिना किसी के दिमाग से गुजरे पहुंच जाते हैं।
 
अधिकारी : वह जो आपके पहुंचने के पहले ऑफिस पहुंच जाता है और यदि कभी आप जल्दी पहुंच जाएं तो काफी देर से आता है।
 
अपराधी : दुनिया के बाकी लोगों जैसा ही मनुष्य, सिवाय इसके कि वह पकड़ा गया है।
 
कंजूस : वह व्यक्ति जो जिंदगी भर गरीबी में रहता है ताकि अमीरी में मर सके।  
अवसरवादी : वह व्यक्ति, जो गलती से नदी में गिर पड़े तो नहाना शुरू कर दे।अनुभव : भूतकाल में की गई गलतियों का दूसरा नाम ।
 
कूटनीतिज्ञ : वह व्यक्ति जो किसी स्त्री का जन्मदिन तो याद रखे पर उसकी उम्र कभी नहीं।दूसरी शादी : अनुभव पर आशा की विजय।  
मनोवैज्ञानिक : वह व्यक्ति, जो किसी खूबसूरत लड़की के कमरे में दाखिल होने पर उस लड़की के सिवाय बाकी सबको गौर से देखता है।
 
नयी साड़ी : जिसे पहनकर स्त्री को उतना ही नशा हो जितना पुरुष को शराब की एक पूरी बोतल पीकर  होता है। 
आशावादी : वह शख्स है जो सिगरेट मांगने पहले अपनी दियासलाई जला ले।  
राजनेता : ऐसा आदमी जो धनवान से धन और गरीबों से वोट इस वादे पर बटोरता है कि वह एक की दूसरे से रक्षा करेगा।
 
आमदनी : जिसमें रहा न जा सके और जिसके बगैर भी रहा न जा सके। 
सभ्य व्यवहार : मुंह बन्द करके जम्हाई लेना । 
ज्ञानी : वह शख्स जिसे प्रभावी ढंग से, सीधी बात को उलझाना आता है।
 
विशेषज्ञ : वह आदमी है जो कम से कम चीजों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानता है।  
शादी : यह मालूम करने का तरीका कि आपकी बीबी को कैसा पति पसन्द आता।  
पड़ोसी : वह महानुभाव जो आपके मामलों को आपसे ज्यादा समझते हैं।
 
नेता : वह शख्स जो अपने देश के लिये आपकी जान की कुर्बानी देने के लिये हमेशा तैयार रहता है।